केंद्र सरकार ने MNREGA को लेकर एक बड़ा और अहम फैसला लिया है, जिससे भविष्य में ग्रामीण रोज़गार के काम करने का तरीका बदल सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई हालिया कैबिनेट बैठक में मनरेगा में कई अहम बदलावों को मंज़ूरी दी गई। इस फैसले को देश भर के ग्रामीण मज़दूरों, खासकर मनरेगा एमपी के मज़दूरों के लिए राहत के तौर पर देखा जा रहा है।
MNREGA को मिली नई पहचान
The government changed the name of the Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act (MGNREGA) to “Poojya Bapu Gramin Rozgar Yojana.” सरकार का कहना है कि यह बदलाव महात्मा गांधी के विचारों और ग्राम स्वराज की भावना को सम्मान देने के लिए किया गया है। हालांकि, सरकार ने यह भी साफ किया है कि योजना की मूल भावना और उद्देश्य पहले जैसे ही रहेंगे।

रोजगार के दिनों में बढ़ोतरी, अब मिलेंगे 125 दिन का काम
अब, MNREGA प्रोग्राम के तहत ग्रामीण परिवारों को 100 दिन का काम मिलता है, लेकिन नए प्रस्ताव में कहा गया है कि इसे बढ़ाकर 125 दिन कर देना चाहिए। इससे ग्रामीण इलाकों में ज़्यादा नौकरियाँ मिलेंगी, खासकर MNREGA MP जैसे राज्यों के मज़दूरों को।
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दैनिक मजदूरी में इजाफा, ₹240 होगी नई दर
सरकार ने महंगाई को ध्यान में रखते हुए रोज़ाना की मज़दूरी बढ़ाने का भी फैसला किया है। अब मज़दूरों को हर दिन ₹240 मिलेंगे। इससे ग्रामीण परिवारों की आय में सुधार होगा और आर्थिक दबाव कुछ हद तक कम होगा।
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नई ग्रामीण रोजगार कानून की तैयारी
सरकार एक नया Rural Employment Law लाने की तैयारी में है, जो मौजूदा MNREGA की जगह ले सकता है। इस नए कानून का मकसद ग्रामीण विकास को ज्यादा मजबूत बनाना, योजनाओं को सरल करना और रोजगार सृजन को आधुनिक जरूरतों के अनुसार ढालना है। यह बिल सांसदों को चर्चा के लिए भेजा जा चुका है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और सरकार का पक्ष
Politics has also gotten more heated because of this decision. Congress ने कहा कि नाम बदलने का कदम दिखावटी है। वहीं सरकार का कहना है कि बजट लगातार बढ़ाया गया है और पारदर्शिता के लिए सख्त कदम उठाए गए हैं। The government says that if this plan is put into action correctly, it could change the game for rural India.