Indian Rupee Slumps to Record Low of 89.43 Against USD – Key Reasons Behind the Fall

Share This News On Social Platforms ⬇️

Facebook
Reddit
Twitter
LinkedIn
Pinterest
WhatsApp
Indian Rupee

Indian Rupee Slumps to Record Low : रावट क्यों आई?

रुपये की इस तेज़ गिरावट के पीछे कई ग्लोबल और घरेलू कारण हैं:

1. Global Risk-Off Sentiment

क्रिप्टोकरेंसी और AI-टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में भारी गिरावट के बाद ग्लोबल मार्केट में डर का माहौल (risk-off) बढ़ गया है। इसका सीधा असर उभरते बाजारों की करेंसी पर पड़ा है, जिसमें रूपया भी शामिल है।

Kotak Securities के Head of Research अनिंद्य बनर्जी के अनुसार:
“रिस्क ट्रेड्स के अचानक अनवाइंड होने से इंडियन रुपये पर दबाव बढ़ा है। साथ ही इंडिया–US ट्रेड डील को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।”

2. India–US Trade Deal की अनिश्चितता

मार्केट उम्मीद कर रहा था कि इस ट्रेड डील से दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों में स्पष्टता आएगी, लेकिन अभी तक कोई ठोस टाइमलाइन सामने नहीं आई है। इससे सेंटीमेंट कमजोर रहा।

Indian Rupee
Indian Rupee

3. RBI का Market Intervention कम होना

रुपये के गिरने की बड़ी वजह यह भी है कि RBI ने 89.00 के लेवल पर कोई खास दखल नहीं दिया। मार्केट में यह माना जाता था कि RBI इस लेवल पर रूपये को बचाएगा।

जब यह धारणा टूटी, तो ऑनशोर और ऑफशोर दोनों मार्केट में अचानक शॉर्ट-कवरिंग शुरू हो गई, जिससे डॉलर और ऊपर चला गया।

ANZ Bank के strategist धीरज निम के अनुसार:
“RBI शायद लगातार एक लेवल को डिफेंड नहीं करना चाहती, खासकर तब जब ट्रेड डील की टाइमिंग साफ नहीं है।”

4. FPI Outflow – विदेशी निवेशकों की बिकवाली

2025 में अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने ₹143,698 करोड़ की भारी बिकवाली की है। इससे भी रुपये पर दबाव बढ़ा।

अब तक रुपया डॉलर के मुकाबले 5% से ज़्यादा गिर चुका है और एशिया की कमजोर करेंसी में गिना जा रहा है।


क्या रुपया 90 प्रति डॉलर तक जा सकता है?

Kotak के analysts का मानना है कि नज़दीकी समय में रिस्क-ऑफ फ्लोज़, मजबूत US Dollar Index और ट्रेड डील की अनिश्चितता के चलते USD/INR का रुझान ऊपर की तरफ रह सकता है।

मार्केट फिलहाल 88.70–90.30 की रेंज पर नज़र रख रहा है।

हालांकि REER के आधार पर रूपया अभी भी अंडरवैल्यूड है। इसका मतलब है कि सही पोज़िटिव ट्रिगर मिलने पर रूपया मजबूत भी हो सकता है। यह ट्रिगर संभवतः India–US Trade Agreement के सफलतापूर्वक साइन होने पर आ सकता है।


निष्कर्ष

रुपये की गिरावट फिलहाल ग्लोबल मार्केट सेंटीमेंट, डॉलर की मजबूती, ट्रेड डील की देरी और घरेलू बिकवाली के कारण है। आने वाले दिनों में 90 रुपये का स्तर भी टेस्ट हो सकता है, लेकिन पक्का रास्ता ट्रेड डील और RBI की रणनीति से ही तय होगा।


Disclaimer

Article End here

Go to Home


Explore All Categories ⬇️

LATEST UPDATES
Join WhatsApp Group