Natural Farming in India 2026: The Complete Guide to Chemical-Free Agriculture
सोचिए — एक किसान जो हर साल हजारों रुपये खाद और कीटनाशकों पर खर्च करता था, आज उसी खेत से दोगुना मुनाफा कमा रहा है। बिना किसी रासायनिक खाद के, बिना किसी महंगे pesticide के। यह कोई सपना नहीं है — यह है प्राकृतिक खेती की ताकत।
आज के दौर में जब महंगाई आसमान छू रही है और खेती की लागत दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है, प्राकृतिक खेती एक ऐसी उम्मीद बनकर सामने आई है जो किसान, उपभोक्ता और धरती — तीनों के लिए फायदेमंद है।
इस ब्लॉग में हम आपको बताएंगे कि प्राकृतिक खेती क्या है, इसे कैसे किया जाता है, इसके क्या फायदे हैं, सरकार इसके लिए क्या कर रही है — और सबसे जरूरी — आप इसे अपने खेत में कैसे शुरू कर सकते हैं।
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Quick Fact: NITI Aayog के अनुसार, Zero Budget Natural Farming (ZBNF) अपनाने के बाद किसानों का मुनाफा दोगुने से भी ज्यादा हो गया — और फसल की पैदावार भी बराबर रही!
Natural Farming क्या है? (What is Natural Farming?)
प्राकृतिक खेती एक ऐसी कृषि पद्धति है जिसमें किसी भी तरह के रासायनिक खाद, pesticide या herbicide का उपयोग नहीं किया जाता। इसके बजाय, खेती पूरी तरह प्रकृति के नियमों पर चलती है।
NITI Aayog की परिभाषा के अनुसार — प्राकृतिक खेती एक रासायनिक-मुक्त पारंपरिक खेती की विधि है जो पारिस्थितिकीय सिद्धांतों पर आधारित है। इसमें फसल, पेड़, पशु और जैव विविधता — सभी का एकीकरण होता है।
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इसे भारत में ‘प्राकृतिक कृषि’ या ‘भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति (BPKP)’ भी कहा जाता है। जापान में इसे Masanobu Fukuoka ने 1975 में अपनी किताब ‘The One-Straw Revolution’ के जरिए दुनिया को बताया था।
भारत में इसे लोकप्रिय बनाने का श्रेय जाता है कृषि वैज्ञानिक Subhash Palekar जी को, जिन्होंने Zero Budget Natural Farming (ZBNF) की अवधारणा विकसित की।
प्राकृतिक खेती बनाम जैविक खेती — क्या अंतर है?
| प्राकृतिक खेती | जैविक खेती (Organic Farming) |
| बाहरी input की जरूरत नहीं | जैविक खाद बाहर से लानी पड़ती है |
| Jeevamrit, Bijamrita — खेत पर ही बनाएं | Vermicompost, Compost — खरीदना या बनाना पड़ता है |
| लागत लगभग शून्य (Zero Budget) | लागत कुछ हद तक होती है |
| गाय-आधारित पद्धति | जानवरों की कम जरूरत |
| Fukuoka और Subhash Palekar का मॉडल | Conventional organic principles |
प्राकृतिक खेती के 5 मूल सिद्धांत ( 4 Core Pillars of Zero Budget Natural Farming )
Masanobu Fukuoka ने प्राकृतिक खेती को 5 मूल सिद्धांतों में बांधा था। ये सिद्धांत आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं:
- जुताई नहीं (No Tillage) — मिट्टी को बेवजह उलटना-पलटना नहीं
- रासायनिक खाद नहीं (No Chemical Fertilizer) — प्रकृति खुद मिट्टी को पोषण देती है
- कीटनाशक नहीं (No Pesticides/Herbicides) — कीड़े और खरपतवार दुश्मन नहीं
- निराई-गुड़ाई नहीं (No Weeding) — ग्राउंड कवर से खरपतवार खुद नियंत्रित होती है
- छंटाई नहीं (No Pruning) — पेड़-पौधों को प्राकृतिक रूप से बढ़ने दें
भारत में Subhash Palekar जी ने इन सिद्धांतों को ZBNF के रूप में भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल बनाया।
ZBNF — Zero Budget Natural Farming कैसे काम करती है?
Zero Budget Natural Farming (ZBNF) का मतलब है — ऐसी खेती जिसकी लागत लगभग शून्य हो। इसमें सभी जरूरी inputs खेत पर ही, और ज्यादातर देसी गाय के गोबर और मूत्र से तैयार किए जाते हैं।
ZBNF की 4 मुख्य techniques हैं:
1. Jeevamrit (जीवामृत)
यह एक liquid microbial culture है जो मिट्टी की जैविक सक्रियता को बढ़ाता है। इसे बनाने के लिए चाहिए:
- 10 किलो देसी गाय का गोबर
- 5 से 10 लीटर देसी गाय का मूत्र
- 2 किलो पुराना गुड़
- 2 किलो किसी भी दाल का आटा
- मुट्ठी भर खेत की मिट्टी
- 200 लीटर पानी में मिलाकर 48 घंटे रखें
एक एकड़ खेत के लिए हर महीने 200 लीटर Jeevamrit काफी है। यह मिट्टी में करोड़ों लाभकारी microbes पैदा करता है।
2. Bijamrita (बीजामृत)
बीज बोने से पहले इस mixture से बीजों का उपचार (seed treatment) किया जाता है ताकि बीज रोगमुक्त हों और अंकुरण बेहतर हो।
- 5 लीटर पानी, 50 ग्राम देसी गाय का गोबर
- 50 ml देसी गाय का मूत्र, थोड़ी-सी चूना और मिट्टी
- बीजों को 6-8 घंटे इसमें भिगोकर फिर छाया में सुखाएं
3. Mulching (आच्छादन)
खेत की मिट्टी को पुआल, सूखी पत्तियों या हरी घास से ढकने की प्रक्रिया। यह नमी बनाए रखती है, खरपतवार रोकती है और मिट्टी का तापमान नियंत्रित करती है।
4. Waaphasa (वाफसा)
Waaphasa का अर्थ है — मिट्टी में हवा और पानी का संतुलन। Subhash Palekar के अनुसार, पौधों की जड़ों को पानी नहीं, बल्कि हवा और नमी दोनों चाहिए। इसलिए कम पानी देने की practice इस farming में core है।
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प्राकृतिक खेती के फायदे (Benefits of Natural Farming)
किसानों के लिए:
- लागत में 70-80% की कमी — बाहरी input नहीं खरीदना पड़ता
- मुनाफा दोगुना — ZBNF farmers की income में 100%+ का इजाफा (Nature journal, 2025)
- कर्ज का बोझ कम — महंगे fertilizers नहीं खरीदने पड़ते
- फसल की quality बेहतर — organic produce की market में अच्छी कीमत
- कम मेहनत, स्थायी खेती — एक बार system बन जाए तो खेत खुद संभलता है
मिट्टी और पर्यावरण के लिए:
- मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है
- भूजल प्रदूषण नहीं होता
- Biodiversity बढ़ती है — फायदेमंद कीड़े, पक्षी, मेंढक आते हैं
- Carbon sequestration — मिट्टी carbon store करती है, climate change कम होता है
- जल संरक्षण — कम सिंचाई में ज्यादा पैदावार
उपभोक्ताओं के लिए:
- रसायन-मुक्त, पोषक, स्वादिष्ट खाना मिलता है
- बीमारियों का खतरा कम — chemical residues नहीं
- Local और seasonal food को बढ़ावा
भारत सरकार की Natural Farming Schemes — 2026
1. National Mission on Natural Farming (NMNF)
भारत सरकार ने December 2024 में NMNF — National Mission on Natural Farming — को एक standalone Centrally Sponsored Scheme के रूप में launch किया। इसके तहत:
- कुल budget: ₹2481 करोड़ (2025-26 तक)
- केंद्र सरकार का हिस्सा: ₹1584 करोड़
- राज्यों का हिस्सा: ₹897 करोड़
- उद्देश्य: पूरे देश में chemical-free farming को mission mode में बढ़ावा
- Ministry of Agriculture & Farmers’ Welfare के अंतर्गत
2. Bhartiya Prakritik Krishi Paddhati (BPKP)
March 2025 तक BPKP scheme के तहत 28 लाख किसान 9.4 लाख हेक्टेयर जमीन पर प्राकृतिक खेती कर रहे हैं।
3. Leading States
- Andhra Pradesh — 6 लाख+ किसान ZBNF कर रहे हैं
- Himachal Pradesh — हजारों किसान chemical farming छोड़ रहे हैं
- Gujarat — Subhash Palekar model की लोकप्रियता
- Karnataka, Uttar Pradesh, Kerala — तेजी से बढ़ रहे हैं
कैसे लें सरकारी सहायता? अपने जिले के कृषि विभाग में संपर्क करें, या naturalfarming.dac.gov.in पर जाएं। NMNF portal पर registration करें और Krishi Sakhi से training लें।
चुनौतियां — Natural Farming में क्या दिक्कतें हैं?
प्राकृतिक खेती के फायदे तो बहुत हैं, लेकिन कुछ चुनौतियां भी हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए:
- Knowledge Gap — यह knowledge-intensive farming है, हर किसान को सीखना पड़ता है
- Transition Period — Chemical farming से natural farming पर आने में 2-3 साल लग सकते हैं, इस दौरान yield थोड़ी कम हो सकती है
- देसी गाय की जरूरत — ZBNF में देसी गाय का गोबर और मूत्र जरूरी है, जो हर किसान के पास नहीं
- Market Access — Natural produce को premium price मिले, इसके लिए certification और market linkage चाहिए
- State Variability — हर राज्य की मिट्टी, जलवायु और social conditions अलग-अलग हैं
लेकिन इन चुनौतियों के बावजूद, जो किसान एक बार यह system समझ लेते हैं, वे पीछे मुड़कर नहीं देखते।
प्राकृतिक खेती कैसे शुरू करें? — Step-by-Step Guide
- शुरुआत छोटे plot से करें — पहले अपने खेत का एक छोटा हिस्सा (1/4 एकड़) choose करें
- देसी गाय का arrangement करें — कम से कम 1 देसी गाय का गोबर/मूत्र चाहिए (पड़ोसी के साथ share कर सकते हैं)
- Jeevamrit बनाना सीखें — ऊपर दी गई recipe से शुरुआत करें
- Bijamrita से बीज उपचार करें — बुवाई से पहले हर बार
- Mulching करें — फसल के आसपास पुआल बिछाएं
- Mixed cropping करें — एक साथ 2-3 फसलें लगाएं
- Training लें — NMNF, Krishi Vigyan Kendra, या YouTube से सीखें
- Record रखें — लागत, पैदावार, मुनाफा — सब note करें
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Conclusion
प्राकृतिक खेती कोई नई trend नहीं है — यह हमारे पुरखों की वो परंपरा है जो हम भूल गए थे। जब हम रासायनिक खेती की तरफ गए, तो कुछ साल तो ज्यादा पैदावार हुई — लेकिन धीरे-धीरे मिट्टी बंजर होने लगी, किसान कर्ज में डूबने लगे, और हमारा खाना जहरीला होता गया।
आज जब सरकार ₹2481 करोड़ की National Mission लेकर आई है, जब science यह साबित कर रही है कि ZBNF से किसानों का मुनाफा दोगुना होता है और biodiversity बढ़ती है — तो यह वक्त है इस बदलाव को अपनाने का।
चाहे आप एक छोटे किसान हों, या बड़े landowner — प्राकृतिक खेती शुरू करने में कभी देर नहीं होती। बस शुरुआत करें, एक छोटे plot से, और देखें कैसे प्रकृति खुद आपके खेत को संभाल लेती है।
याद रखें: प्राकृतिक खेती सिर्फ एक technique नहीं है — यह एक नजरिया है। यह मानना कि हम प्रकृति के ऊपर नहीं, बल्कि उसका एक हिस्सा हैं।
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Frequently Asked Questions
What is Natural Farming in simple words?
Natural Farming is a method of growing crops without using any chemical fertilizers, pesticides, or herbicides. Instead, it uses on-farm inputs like cow dung, cow urine, plant-based preparations, and natural biodiversity to produce food sustainably.
Is Natural Farming the same as Organic Farming?
No. While both avoid synthetic chemicals, Natural Farming (especially ZBNF) goes further — it avoids even purchased organic inputs. Everything is made on the farm at near-zero cost, making it especially suitable for small and marginal farmers.
How does the government support Natural Farming in India?
The Government of India launched the National Mission on Natural Farming (NMNF) with a budget of ₹2,481 crore. Farmers can register at naturalfarming.dac.gov.in and connect with Krishi Sakhis for training.
Does Natural Farming reduce crop yield?
In the first 1–3 years of transition, yield may slightly decrease as soil recovers from chemical dependency. However, research published in Nature Ecology & Evolution (2025) shows that after the transition, yields remain comparable to chemical farming while profits more than double.
What is Jeevamrit and how is it made?
Jeevamrit is a natural liquid microbial culture made from native cow dung, cow urine, jaggery, pulse flour, and farm soil fermented in water for 48 hours. It enriches the soil with billions of beneficial microbes and is applied to crops monthly.

